राजनीतिक

विपक्ष का आरोप: लोकसभा अध्यक्ष पर उठे पक्षपात के सवाल

नई दिल्ली
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए जा रहे अविश्वास प्रस्ताव को लेकर संसद के भीतर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। विपक्षी दलों के नेताओं ने एक ओर जहां स्पीकर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं तो दूसरी ओर सत्र के दौरान अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा की मांग की है।

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव आ रहा है लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण कई अन्य मुद्दे हैं जिन पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। ओम बिरला जानबूझकर भाजपा का पक्ष ले रहे हैं जबकि स्पीकर को इस तरह का काम नहीं करना चाहिए। भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष की स्थिति पर भारत की क्या नीति है, यह स्पष्ट होना चाहिए।

देश को यह जानने का अधिकार है कि भारत सरकार और विदेश मंत्रालय इस मुद्दे पर क्या रुख अपना रहे हैं। संसद में विदेश नीति जैसे अहम विषयों पर भी गंभीर चर्चा होनी चाहिए। कांग्रेस सांसद रजनी पाटिल ने आरोप लगाया कि लोकसभा अध्यक्ष ने अलोकतांत्रिक तरीके से विपक्ष के नेता को सदन में बोलने का अवसर नहीं दिया। विपक्ष इस मुद्दे पर जवाब मांगेगा और इसी कारण स्पीकर को पद से हटाने की मांग की जा रही है।

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने भी लोकसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्पीकर का पद पूरी तरह निष्पक्ष होना चाहिए लेकिन मौजूदा स्थिति में ऐसा नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के राहुल गांधी से राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं लेकिन वह विपक्ष के नेता हैं और उन्हें सदन में अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।

कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने कहा कि मौजूदा स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव इसलिए लाया जा रहा है क्योंकि विपक्ष के नेताओं को सदन में बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा है। संसद की सबसे बड़ी जिम्मेदारी महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुली और निष्पक्ष बहस कराना है।

इसी मुद्दे पर कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष को अविश्वास प्रस्ताव लाने का अधिकार है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इस मुद्दे पर उचित और विस्तृत चर्चा सुनिश्चित करे। साथ ही, उन्होंने मध्य-पूर्व के हालात को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीयों और वहां काम करने वाले लोगों की सुरक्षा व आजीविका को लेकर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button