बिहार-झारखंडराज्य

चाईबासा में कोल्हान रक्षा संघ का हुंकार, अरबों का खनिज देने वाला सारंडा अब भी सुविधाओं का प्यासा

  चाईबासा

झारखंड के चाईबासा में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में कोल्हान क्षेत्र की दयनीय स्थिति और संसाधनों के दोहन पर गहरी चिंता जताई गई. बैठक में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है जब कोल्हान की दशा को एक नई दिशा दी जाए. ​

मुख्य अतिथि ने क्या कहा?
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि कोल्हान रक्षा संघ के अध्यक्ष डीबार जोंकों ने कहा यह कितनी बड़ी विडंबना है कि टाटा स्टील जैसी कंपनियां जमशेदपुर को दुल्हन की तरह सजाने में लगी हैं, लेकिन जिस सारंडा और कोल्हान की कोख से वह लोहा निकलता है, वहां के लोग आज भी प्यासे हैं. हमारे पास न शुद्ध पीने का पानी है, न रहने को पक्का आवास और न चलने को सड़कें. आज भी यहां का युवा लकड़ी, दातुन और पत्ते बेचकर पेट भरने को मजबूर है. शिक्षा और स्वास्थ्य की व्यवस्थाएं कागजों तक सिमट कर रह गई हैं.

बैठक में पेश किया आंकड़ा
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, कोल्हान क्षेत्र झारखंड के लौह अयस्क उत्पादन का 70-80% हिस्सा प्रदान करता है. मात्र एक महीने में 18.72 लाख टन उत्पादन हुआ, जिसका मूल्य ₹585.89 करोड़ है. कोल्हान से होने वाले वार्षिक उत्खनन का मूल्य लगभग 7,000 रू से 7,500 रू करोड़ बैठता है. ​कोल्हान रक्षा संघ के सदस्य रविन्द्र मंडल ने इन आंकड़ों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा अगर सालाना 7,500 करोड़ रुपये का खनिज हमारे पैरों के नीचे से निकाला जा रहा है, तो यहां की जनता दर-दर की ठोकरें क्यों खा रही है? रॉयल्टी और DMF (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) का पैसा कहां जा रहा है? कोल्हान की जनता अब मूकदर्शक बनी नहीं रहेगी. हमें विकास में हिस्सेदारी चाहिए, केवल आश्वासन नहीं. ​बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि कोल्हान के अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा.  खनिज उत्खनन में लगी कंपनियों में 75% स्थानीय युवाओं को अनिवार्य रोजगार मिलना चाहिए.सारंडा के सुदूर गांवों तक पक्की सड़कें और शुद्ध पेयजल की तत्काल व्यवस्था होनी चाहिए. प्रभावित क्षेत्रों में अत्याधुनिक अस्पताल और तकनीकी शिक्षण संस्थानों की स्थापना होनी चाहिए. जिसके लिये कोल्हान रक्षा संघ ग्रामीणों के हित के लिये उग्र आंदोलन करेगा.  

इस संकल्प के साथ बैठक का समापन
बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि कोल्हान की संपदा का लाभ सबसे पहले यहां के आदिवासियों और मूलवासियों को मिलना चाहिए. जब तक सारंडा के अंतिम व्यक्ति तक विकास नहीं पहुंचता, खनिज संपदा के इन आंकड़ों का जनता के लिए कोई मोल नहीं है. इस मौके पर महासचिव मानसिंह हेंब्रम, जय सिंह हेम्ब्रम, अधिवक्ता पूनम हेंब्रम, शिवनंदन किस्कू ,लक्ष्मण मंडल, सुमित्रा जोंको,रमेश केराई,हरीश लागुरी,बागुन केराई ,राजेन्द्र केराई,महती बोयपाई,विशाला बोयपाई ,डूरा केराई,रोया बोयपाई,मुर्गा केराई समेत काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button