
चंडीगढ़.
हरियाणा में उद्योगों और श्रमिकों के विवाद सुलझाने के लिए उद्योग-श्रमिक मैत्री परिषद गठित करने के बाद अब सरकार ने नियमों में भी बदलाव की तैयारी कर ली है। श्रम विभाग ने इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड में बदलाव के लिए प्रारूप जारी कर दिया है। इसी तरह नए लेबर कोड लागू करने के लिए ड्राफ्ट जारी कर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं।
नए नियमों को इंडस्ट्रियल रिलेशन (हरियाणा) रूल-2026 का नाम दिया गया है। विवादों को सुलझाने में श्रम आयुक्त, उप श्रम आयुक्त और सहायक श्रम आयुक्तों की विशेष भूमिका होगी, जो नियोक्ताओं और श्रमिक यूनियनों के बीच मध्यस्थ की भूमिका में होंगे। समझौते को लिखित रूप से लिया जाएगा।
क्या कहते हैं ने लेबर कोड?
नए लेबर कोड के अनुसार पूरे राज्य में वेतन, बोनस, ओवरटाइम, न्यूनतम मजदूरी और कर्मचारियों के अधिकारों की एक समान व्यवस्था लागू होगी। राज्य सलाहकार बोर्ड बनाया जाएगा, जिसमें कर्मचारी, नियोक्ता और विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह बोर्ड वेतन नीतियों पर सुझाव देगा। कर्मचारियों को उनके काम की प्रकृति अकुशल, अर्धकुशल, कुशल और उच्च कुशल के आधार पर वेतन मिलेगा। अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से वेतन तय किया जाएगा। न्यूनतम वेतन तय करते समय केवल बेसिक मजदूरी नहीं, परिवार का पूरा खर्च ध्यान में रखा जाएगा। इसमें भोजन, कपड़े, किराया, बिजली, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और अन्य जरूरतें शामिल होंगी। मजदूरी को घंटे, दिन और महीने के हिसाब से तय किया जाएगा।
महंगाई भत्ता साल में दो बार संशोधित होगा
महंगाई भत्ता साल में दो बार संशोधित होगा। हर कर्मचारी को हर सप्ताह कम से कम एक अनिवार्य छुट्टी मिलेगी। ओवरटाइम, नाइट शिफ्ट, वेतन कटौती, जुर्माना और बोनस के स्पष्ट नियम लागू होंगे ताकि मनमानी कम हो। सभी कंपनियों और संस्थानों को अब कर्मचारियों का वेतन रजिस्टर, उपस्थिति रिकॉर्ड, बोनस, कटौती और वेतन पर्ची डिजिटल या लिखित रूप में रखना जरूरी होगा।
वहीं, व्यापारियों, दुकानदारों और व्यावसायिक संस्थानों को राहत देते हुए नया नियम लागू किया है। अगर कोई संस्थान श्रमिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता 2020 के तहत पंजीकृत हो जाता है तो उसे अलग से दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान कानून के तहत व्यवसाय शुरू करने के लिए दोबारा पंजीकरण नहीं कराना होगा। इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि व्यापार शुरू करने की प्रक्रिया सरल होगी, सरकारी औपचारिकताएं कम होंगी और कारोबारियों का समय व पैसा बचेगा। अन्य श्रम और व्यावसायिक नियम पहले की तरह लागू रहेंगे और संस्थानों को उनका पालन करना होगा।




