NEET Protest पर राजनीति तेज, पंजाब-झारखंड पर चुप्पी को लेकर विपक्ष और CJP पर उठे सवाल

नई दिल्ली/चंडीगढ़/रांची,
देशभर में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और नीट (NEET) जैसी केंद्रीय परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच अब गैर-भाजपा शासित राज्यों में भी भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद चर्चा में हैं. विशेष रूप से आम आदमी पार्टी (AAP) शासित पंजाब और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेतृत्व वाली झारखंड सरकार के दौरान सामने आए मामलों को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं. आइए जानते हैं क्यों छिड़ी ये बहस।
अभी हाल ही में पेपरलीक को लेकर जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन की तस्वीरों के बीच विपक्ष के नेता राहुल गांधी की तस्वीर भी वायरल हुई थी. वो पेपरलीक और छात्रों के साथ मारपीट को लेकर विरोध कर रहे थे. लेकिन सत्तापक्ष अब ये सवाल उठा रहा है कि अगर पेपर लीक हो रहे हैं और शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा भी दे दिया तो अब आखिर गैर भाजपा शासित प्रदेशों के लिए ये मांग क्यों नहीं उठती. क्यों वहां पर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं मांंगा जा रहा है. यहां हैं वो मामले जिन पर घिर रहा विपक्ष।
1. पंजाब का मामला: हाई-टेक चीटिंग रैकेट
पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार शिक्षा और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को अपनी प्रमुख उपलब्धियों में गिनाती रही है. हालांकि हाल ही में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा के दौरान सामने आए हाई-टेक नकल रैकेट ने सरकार को विपक्ष के निशाने पर ला दिया।
फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा (जुलाई 2026):
19 जुलाई 2026 को पंजाब पुलिस ने एक अंतरराज्यीय हाई-टेक चीटिंग रैकेट का खुलासा किया. जांच के अनुसार परीक्षा शुरू होने के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने पेन कैमरा, मॉडिफाइड मोबाइल फोन और ब्लूटूथ इयरपीस के जरिए प्रश्न बाहर भेजे और बाहर बैठे लोगों से उत्तर प्राप्त किए. इस मामले में कथित मास्टरमाइंड और अभ्यर्थियों सहित कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
विपक्ष का दावा:
पूर्व आप नेता स्वाति मालीवाल, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (SAD) का आरोप है कि पंजाब में पिछले कुछ वर्षों के दौरान PSTET, कक्षा 12वीं अंग्रेजी परीक्षा और अन्य भर्ती परीक्षाओं समेत कई परीक्षाओं में अनियमितताएं या पेपर लीक के मामले सामने आए हैं. राज्य सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है।
सरकार का पक्ष:
मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि फार्मेसी भर्ती परीक्षा में पेपर पहले से लीक नहीं हुआ था, बल्कि हाई-टेक नकल की कोशिश को समय रहते पकड़ लिया गया और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. विपक्ष ने इस मामले को लेकर शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे की मांग की है।
2. झारखंड का मामला: JSSC-CGL परीक्षा विवाद और जांच
झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा भी लंबे समय तक विवादों में रही.
जनवरी और सितंबर 2024 की परीक्षा:
जनवरी 2024 में परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी. इसके बाद सितंबर 2024 में 823 केंद्रों पर दोबारा परीक्षा आयोजित की गई, जिसके दौरान राज्य सरकार ने परीक्षा अवधि में इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद की थीं।
जांच और गिरफ्तारियां:
दोबारा परीक्षा के बाद भी धांधली के आरोप लगे. जांच के दौरान सीआईडी ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से एक आरोपी को गिरफ्तार किया. जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि अभ्यर्थियों को नेपाल ले जाकर प्रश्न याद कराए जाते थे. मामले में सुरक्षा बल (IRB) के कुछ जवानों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई।
अदालती घटनाक्रम:
फरवरी 2026 में झारखंड हाई कोर्ट ने वित्त विभाग के एक कर्मचारी को जमानत दी, जिसे कथित तौर पर पेपर लीक से जुड़ी अफवाह फैलाने के मामले में गिरफ्तार किया गया था. वहीं जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया, जिसमें परीक्षा परिणाम जारी रखने की अनुमति दी गई थी. इसके बावजूद परीक्षा प्रक्रिया को लेकर कई अभ्यर्थियों में असंतोष बना रहा।
3. क्या विपक्ष के लिए नई चुनौती बन रहे हैं ये मामले?
संसद के मॉनसून सत्र में जब विपक्ष केंद्र सरकार और केंद्रीय परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार पर हमलावर है, तब भाजपा इन राज्यों के मामलों का हवाला देकर पलटवार कर रही है।
भाजपा और एनडीए के नेताओं का कहना है कि परीक्षा अनियमितताओं का मुद्दा केवल केंद्र या भाजपा शासित राज्यों तक सीमित नहीं है. उनका सवाल है कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग की जाती है, तो विपक्ष अपने शासित राज्यों में उठे विवादों पर समान राजनीतिक जवाबदेही क्यों नहीं तय करता।
4. CJP और छात्र संगठनों को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
नीट और अन्य केंद्रीय परीक्षाओं से जुड़े विवादों के दौरान CJP जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और कई छात्र समूह सक्रिय रहे. हालांकि अब कुछ राजनीतिक दलों और विश्लेषकों का आरोप है कि पंजाब और झारखंड जैसे मामलों पर उनकी सक्रियता उतनी दिखाई नहीं दी।
चयनात्मक विरोध के आरोप:
स्वाति मालीवाल समेत कुछ नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों का आरोप है कि छात्र आंदोलन और कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म केंद्र सरकार और NTA से जुड़े मामलों पर ज्यादा मुखर रहते हैं, जबकि विपक्ष शासित राज्यों में सामने आए विवादों पर अपेक्षाकृत कम प्रतिक्रिया देते हैं. इन आरोपों पर संबंधित संगठनों की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक जवाब सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
कुछ प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग हर राज्य और हर परीक्षा के लिए समान रूप से उठनी चाहिए. उनका मानना है कि यदि किसी भी राज्य में भर्ती या परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो उस पर भी समान गंभीरता से आवाज उठनी चाहिए।




