मध्य प्रदेश

मृत लोगों के जॉब कार्ड से मनरेगा भुगतान का आरोप, कलेक्टर से जांच की मांग

मृत लोगों के जॉब कार्ड से मनरेगा भुगतान का आरोप, कलेक्टर से जांच की मांग

इमलिया ग्राम पंचायत में फर्जी हाजिरी लगाकर शासकीय राशि निकालने की शिकायत, ऑनलाइन रिकॉर्ड और मस्टर रोल जांचने की मांग

मुरैना
जनपद पंचायत मुरैना की ग्राम पंचायत इमलिया में मनरेगा कार्यों में कथित अनियमितता और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। ग्राम इमलिया निवासी धर्मवीर मोर्य ने कलेक्टर मुरैना को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि मृत व्यक्तियों तथा विवाह के बाद अन्यत्र जा चुकी महिलाओं के नाम से मनरेगा में फर्जी हाजिरी दर्ज कर मजदूरी राशि निकाली जा रही है।

शिकायत में बताया गया है कि उनके भाई दिलीप पिता मोतीराम की वर्ष 2010 में मृत्यु हो चुकी है। उनका जॉब कार्ड क्रमांक MP-01-003-079-001/41 है। आरोप है कि इस जॉब कार्ड में वीरू नामक व्यक्ति का नाम जोड़कर उसके नाम से हाजिरी भरकर भुगतान कराया गया।

इसी प्रकार मृत दामोदर बघेल के जॉब कार्ड क्रमांक MP-01-003-079-001/14A में बिसन नामक व्यक्ति का नाम जोड़कर मजदूरी भुगतान लेने का आरोप लगाया गया है। वहीं महाराज सिंह के जॉब कार्ड क्रमांक MP-01-003-079-001/236 में भी कथित रूप से फर्जी हाजिरी भरकर राशि निकाले जाने की शिकायत की गई है।

आवेदन में मुन्ना ठकुरी के जॉब कार्ड क्रमांक MP-01-003-079-001/69 का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार उनकी पत्नी लक्ष्मी की लगभग 15 वर्ष पूर्व मृत्यु हो चुकी है, इसके बावजूद जॉब कार्ड में गुड्डी नामक महिला का नाम जोड़कर दोनों के नाम से भुगतान निकाले जाने का आरोप है।

इसके अलावा सुरेश सिंह के जॉब कार्ड क्रमांक MP-01-003-079-001/114 में उनकी पुत्री नीतू, जिसकी शादी 10 वर्ष से अधिक पहले हो चुकी है, के नाम से भी मनरेगा भुगतान किए जाने की शिकायत की गई है।

शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से संबंधित जॉब कार्ड, मस्टर रोल, हाजिरी रजिस्टर, मजदूरी भुगतान विवरण, बैंक खातों तथा मनरेगा के ऑनलाइन रिकॉर्ड की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही आरोप सही पाए जाने पर दोषी व्यक्तियों के साथ जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा शासकीय राशि की वसूली की मांग की गई है।

धर्मवीर मोर्य ने ग्राम पंचायत इमलिया के अन्य मृत व्यक्तियों के जॉब कार्डों का भी सत्यापन कराने की मांग की है। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि जॉब कार्ड, मस्टर रोल और भुगतान रिकॉर्ड में वास्तव में कोई अनियमितता हुई है या नहीं।

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