राजस्थानराज्य

राजस्थान में 23 लाख पांडुलिपियों का सर्वे, 1.24 लाख डिजिटाइज्ड; हर पांडुलिपि को डिजिटल करने का लक्ष्य

जयपुर
संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित "ज्ञान भारतम मिशन" के तहत राजस्थान राज्य में "पाण्डुलिपि डिजिटलीकरण कार्यशाला" का आयोजन सोमवार को जयपुर के झालाना संस्थानिक क्षेत्र स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन तथा कला एवं संस्कृति मंत्री  दिया कुमारी के मुख्य आतिथ्य में किया गया। इस अवसर पर राज्य के मुख्य सचिव वी.निवास उपस्थित रहे।

उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि पांडुलिपियां केवल पुराने कागज या ग्रन्थ नहीं हैं, ये भारत के हजारों वर्षों के साहित्य, परम्परा, इतिहास और दर्शन की धरोहर हैं। इनमें हमारे पूर्वजों के अनुभव, शोध और ज्ञान का भण्डार सुरक्षित है। एक पाण्डुलिपि केवल अतीत की कहानी नहीं कहती, बल्कि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए नए मार्ग खोलती है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में "ज्ञान भारतम मिशन" इसी संकल्प को नई तकनीक से जोड़ रहा है। मोदी जी का विजन है कि हमारा प्राचीन ज्ञान अलमारियों में बंद न रहे, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से दुनिया तक पहुंचे और विकसित भारत की शक्ति बने। प्रधानमंत्री जी की सोच को केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत जी के मार्गदर्शन में साकार किया जा रहा है।

उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के मार्गदर्शन में राजस्थान में पाण्डुलिपियों को संरक्षित करने के लिए निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान के तहत राजकीय व निजी संग्रह, पुस्तकालयों, मंदिर, मठों आदि से लगभग 23 लाख पांडुलिपियों का सर्वे किया गया है, जिसमें से लगभग एक लाख चौबीस हजार को डिजिटाइज्ड किया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि राजस्थान की प्रत्येक पाण्डुलिपि को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाए ताकि युवा शोधार्थी, विद्यार्थी और आम जन भी हमारे शास्त्रों, आयुर्वेद, ज्योतिष और साहित्य के ज्ञान से जुड़ सकें। इसके लिए जिला स्तर पर भी संरक्षण केन्द्र विकसित किए जाएंगे और निजी संग्रहकर्ताओं को भी इस मिशन से जोड़ा जाएगा।

प्राचीन ग्रंथ और दस्तावेज देश की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर -मुख्य सचिव
 मुख्य सचिव वी.निवास ने कहा कि प्राचीन ग्रंथ और दस्तावेज देश की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर हैं और ज्ञान भारतम मिशन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। राजस्थान का इतिहास और सभ्यता बहुत समृद्ध है। मिशन को और सफल बनाने के लिए सभी विश्वविद्यालयों के संस्कृत विभागों को साथ लेकर तालपत्रों के संरक्षण और संस्कृत शब्दावली तैयार करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस कार्य में सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए और युवाओं को इस क्षेत्र में शोध के लिए प्रेरित किया जाए। पाण्डुलिपियों में छिपा ज्ञान यदि तकनीक के माध्यम से सहज रूप से उपलब्ध होगा तो यह न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश की ज्ञान परम्परा को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाएगा।

उक्त कार्यशाला में संस्कृति मंत्रालय नई दिल्ली से संयुक्त सचिव समीर नंदा, निदेशक इंद्रजीत सिंह , आयुक्त पर्यटन विभागमती रुक्मणी रियार, शासनउप सचिव, कला एवं संस्कृति विभाग, अनुपम कायल, निदेशक राजस्थान संस्कृत अकादमी, डॉ. लतामाली, सयुंक्त निदेशक, पुरातत्व संग्रहालय विभाग,मती कृष्णकांता शर्मा, प्रबंधक रविन्द्र मंच, कविता गोदारा, सहायक नोडल अधिकारी ज्ञानभारतम, रजनीश हर्ष एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

ज्ञानभारतम मिशन के राजस्थान समन्वयक डॉ. सुरेन्द्र शर्मा ने राजस्थान का प्रजेंटेशन दिया और सभी राज्य से आये हुए अधिकारीगणों को अवगत कराया कि राजस्थान किस प्रकार इस मिशन में रोल मॉडल बनकर उभरा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button