🔖 परिचय: ऐतिहासिक कदम की ओर
जनवरी 2025 में, उत्तराखंड ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) को लागू किया, जिससे यह स्वतंत्रता के बाद UCC लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पारित यह कानून विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, और लिव-इन संबंधों जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान नियम निर्धारित करता है, चाहे उनका धर्म, जाति या लिंग कुछ भी हो। इस कानून के तहत बहुविवाह, हलाला, और बाल विवाह जैसे प्रथाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा, सभी विवाहों और लिव-इन संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। यह कानून महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
📜 UCC के प्रमुख प्रावधान
- विवाह और तलाक
- आयु सीमा: पुरुषों के लिए न्यूनतम विवाह आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित की गई है।
- पंजीकरण: सभी विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य है, जो विवाह के 60 दिनों के भीतर करना होगा।
- बहुविवाह पर रोक: एक समय में केवल एक विवाह की अनुमति है; बहुविवाह को अवैध घोषित किया गया है।
- तलाक के आधार: तलाक के लिए समान आधार निर्धारित किए गए हैं, जैसे कि क्रूरता, व्यभिचार, परित्याग, मानसिक विकार आदि।
- उत्तराधिकार और संपत्ति अधिकार
- संतानों के लिए समान अधिकार: पुत्र और पुत्री दोनों को समान संपत्ति अधिकार प्राप्त होंगे, चाहे वे जैविक, दत्तक, सरोगेसी या सहायक प्रजनन तकनीक से जन्मे हों।
- पति-पत्नी के अधिकार: पति और पत्नी दोनों को विवाहोपरांत संपत्ति में समान अधिकार प्राप्त होंगे।
- मृत्यु के बाद अधिकार: व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति में उसके जीवनसाथी, संतान और माता-पिता को समान अधिकार मिलेंगे।
- लिव-इन संबंध
- पंजीकरण अनिवार्य: लिव-इन संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है, जो संबंध स्थापित करने के 30 दिनों के भीतर करना होगा।
- अधिकार और सुरक्षा: लिव-इन संबंधों में रहने वाली महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और भरण-पोषण का अधिकार प्राप्त होगा।
- संतानों की वैधता: लिव-इन संबंधों से जन्मे बच्चों को वैध माना जाएगा और उन्हें समान अधिकार प्राप्त होंगे।
⚖️ सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव
UCC के लागू होने से उत्तराखंड में सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर कई प्रभाव देखने को मिले हैं:
- महिलाओं का सशक्तिकरण: महिलाओं को समान अधिकार मिलने से उनका सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण हुआ है।
- धार्मिक समुदायों की प्रतिक्रिया: कुछ धार्मिक समुदायों ने इस कानून को अपनी धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप के रूप में देखा है, जबकि अन्य ने इसे समानता की दिशा में एक कदम माना है।
- राजनीतिक दृष्टिकोण: BJP ने इसे अपने चुनावी वादे के रूप में प्रस्तुत किया है, जबकि विपक्ष ने इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर आघात बताया है।
🌐 डिजिटल पहल: UCC पोर्टल
उत्तराखंड सरकार ने UCC के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है, जिससे नागरिक विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, और लिव-इन संबंधों का पंजीकरण आसानी से कर सकते हैं। यह पोर्टल उपयोगकर्ताओं को मोबाइल फोन के माध्यम से सेवाओं का लाभ उठाने की सुविधा प्रदान करता है।
🔚 निष्कर्ष
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता का लागू होना एक ऐतिहासिक कदम है, जो सामाजिक समानता, महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा, और कानूनी प्रक्रिया की पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। हालांकि, इसके सामाजिक और राजनीतिक प्रभावों पर बहस जारी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि यह कानून भारत में समानता और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।




