
रोहतक
हरियाणा में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा 2021 को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अंतर्गत शुरू किया गया बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान यानी फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (एफएलएन) के तहत पढ़ाई करवाई जा रही है।
इस पहल के तहत 2026–27 तक प्रत्येक बच्चे को कक्षा 3 के अंत तक बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान में काबिल बनाना है, ताकि प्रारम्भिक कक्षाओं में ही बच्चे पढ़ना, लिखना और गणित की बुनियादी समझ विकसित कर सके, जिससे आगे की शिक्षा में उन्हें कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़े।
विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में वृद्धि
टीचिंग-लर्निंग प्रैक्टिसेस सर्वे 2025 के अनुसार, सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच दो चरणों के आकलन में विद्यार्थियों की दक्षता में सुधार हुआ है। सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच हुए मूल्यांकन में पाया गया कि कैटेगरी-ए स्कूलों की संख्या 7 प्रतिशत से बढ़कर 53 प्रतिशत हो गई और कैटेगरी-सी स्कूलों की संख्या 74 प्रतिशत से घटकर 23 प्रतिशत रह गई। यह दर्शाता है कि विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशनल में सीनियर एकेडमिक प्रोफेशनल अजय गुप्ता ने बताया कि टीचिंग-लर्निंग प्रैक्टिसेस सर्वे (टीएलपीएस) 2025 में सामने आया कि फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (एफएलएन) को लेकर सकारात्मक पहलें हुई हैं और उनका असर भी दिखाई देता है।
वहीं यदि बच्चों की त्रुटियों को समय रहते समझा जाए और उन्हें सुधारने में सहयोग दिया जाए, तो सीखने की प्रक्रिया कहीं अधिक प्रभावी बन सकती है। क्योंकि कई बार कक्षा में अपनाए गए छोटे-छोटे बदलाव ही बच्चे के सीखने में बड़ा अंतर पैदा कर सकते हैं।
पढ़ने की क्षमता में सुधार
टीचिंग-लर्निंग प्रैक्टिसेस सर्वे 2025 के अनुसार, कक्षा दूसरी के विद्यार्थियों का साक्षरता स्तर 46.5 प्रतिशत से बढ़कर 67 प्रतिशत हो गया। कक्षा तीसरी का साक्षरता स्तर 44.2 प्रतिशत से बढ़कर 61.4 प्रतिशत हुआ। इसके साथ ही प्रति मिनट 45 शब्द पढ़ने वाले विद्यार्थियों का प्रतिशत 48 से बढ़कर 65 प्रतिशत हो गया और 31 प्रतिशत विद्यार्थी प्रति मिनट 60 शब्द पढ़ने में सक्षम पाए गए।
जिला एफएलएन कोऑर्डिनेटर रूपांशी डुड्डा ने बताया कि प्रदेश भर के स्कूलों में प्रत्येक बच्चे को निपुण बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए शिक्षा विभाग की ओर से अनेक कदम उठाए जा रहे हैं।
स्कूलों में बच्चों को टीएलएम का प्रयोग कर पढ़ाई करवाई जा रही है। फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (एफएलएन) के तहत सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की सीखने की गुणवत्ता में व्यापक सुधार किया है।
कक्षाओं में बेहतर हुआ सीखने का माहौल
टीचिंग-लर्निंग प्रैक्टिसेस सर्वे (TLPS) 2025 के अनुसार, हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का माहौल पहले से बेहतर हुआ है। सर्वे में पाया गया कि 71% समय शिक्षक पढ़ाने में, जबकि 12% समय बच्चों की भागीदारी वाली गतिविधियों में बीता। हालांकि, 31% समय बच्चे किसी सीखने की गतिविधि में शामिल नहीं थे।
83% शिक्षकों ने पिछले एक वर्ष में एफएलएन प्रशिक्षण प्राप्त किया और अब शत-प्रतिशत शिक्षकों को यह प्रशिक्षण दिया जा चुका है। लगभग 75 प्रतिशत कक्षाओं में चार्ट, पोस्टर और अन्य शिक्षण सामग्री लगाई गई थी, जिनमें से 80 प्रतिशत सामग्री बच्चों की आँखों के स्तर पर थी। इससे बच्चों के लिए सीखना अधिक आसान और रोचक बना है।
क्या हैं निपुण भारत के मुख्य उद्देश्य?
निपुण भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा 5 जुलाई 2021 को शुरू किया गया एक राष्ट्रीय मिशन है। NIPUN का पूरा नाम नेशनल इनिशिएटिव फॉर प्रोफिशीयंशि इन रीड़िग विथ अंडरस्टेनड़िंग एंड नियुमेरेसी है। यह मिशन राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत संचालित किया जा रहा है और एफएलएन को मजबूत बनाने पर
केंद्रित है। निपुण भारत के मुख्य उद्देश्य है:
1.प्रत्येक बच्चे को समझ के साथ पढ़ना और लिखना सिखाना।
2.बच्चों में बुनियादी गणितीय कौशल विकसित करना।
3.गतिविधि आधारित और बाल-केंद्रित शिक्षण को बढ़ावा देना।
4.शिक्षकों को प्रशिक्षण और शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराना।
5.वर्ष 2026–27 तक सभी बच्चों को कक्षा 3 के अंत तक एफएलएन में काबिल बनाना।




