पंजाबराज्य

चंडीगढ़ में प्रॉपर्टी किराये के नए नियम लागू, 2 महीने के भीतर देनी होगी एग्रीमेंट की जानकारी

चंडीगढ़.

चंडीगढ़ में मकान मालिक और किरायेदारों के बीच होने वाले विवादों के निपटारे को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की तैयारी पूरी हो गई है। चंडीगढ़ प्रशासन के संपदा विभाग ने यूटी चंडीगढ़ टेनेंसी रूल्स, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। नए नियम 10 सितंबर से पूरे चंडीगढ़ में प्रभावी हो गए हैं।

नए नियमों में किरायेदारी एग्रीमेंट की ऑनलाइन जानकारी देना जरूरी किया गया है। एग्रीमेंट होने के दो महीने के भीतर रेंट अथॉरिटी को जानकारी देनी होगी। नई व्यवस्था में किरायेदारी समझौते से लेकर किराये में बदलाव, सुरक्षा राशि, परिसर खाली कराने और विवादों के निपटारे तक की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। इसके लिए किराया प्राधिकरण, किराया न्यायालय और किराया अधिकरण की त्रिस्तरीय व्यवस्था बनाई गई है। उपायुक्त-सह-संपदा अधिकारी निशांत कुमार यादव, आईएएस ने कहा कि नए नियम मकान मालिकों और किरायेदारों के संबंधों में सुगमता, पारदर्शिता और निश्चितता लाएंगे तथा विवादों के समाधान के लिए सुव्यवस्थित तंत्र सुनिश्चित करेंगे।

एग्रीमेंट के 2 महीने में देनी होगी जानकारी: नए नियमों के अनुसार मकान मालिक और किरायेदार को किरायेदारी समझौता होने के दो माह के भीतर संयुक्त रूप से या अलग-अलग ऑनलाइन माध्यम से किराया प्राधिकरण को इसकी सूचना देनी होगी। सूचना मिलने के सात दिन के भीतर प्राधिकरण पक्षकारों को ई-रसीद के रूप में विशिष्ट पहचान संख्या जारी करेगा। यह पंजीकृत मोबाइल नंबर या ई-मेल पर भेजी जाएगी। मकान मालिक किराये से मना करे तो भी रास्ता : यदि मकान मालिक किराया या अन्य देय राशि लेने से इनकार करता है अथवा रसीद जारी नहीं करता, तो किरायेदार लगातार दो माह तक आरटीजीएस, एनईएफटी, चेक या डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से भुगतान का प्रयास कर सकेगा। इसके बाद भी भुगतान स्वीकार नहीं होने पर किरायेदार राशि किराया प्राधिकरण के पास जमा करा सकेगा।

किराया, बिजली-पानी और मेंटेनेंस विवाद भी अथॉरिटी में: किराया, बिजली, पानी या मेंटेनेंस चार्ज के विवाद पर रेंट अथॉरिटी में आवेदन कर सकेंगे। फैसला लेते समय आसपास के क्षेत्र में चल रहे प्रचलित किराये को भी ध्यान में रखा जाएगा।  तीन महीने में बनेगा डिजिटल प्लेटफॉर्म: किराया प्राधिकरण के गठन के तीन माह के भीतर स्थानीय भाषा और प्रशासन द्वारा निर्धारित अन्य भाषाओं में डिजिटल मंच तैयार किया जाएगा। इस पर किरायेदारी से जुड़े दस्तावेज ऑनलाइन जमा किए जा सकेंगे। दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए ओटीपी आधारित सत्यापन होगा। किरायेदारी संबंधी रिकॉर्ड गोपनीय रखे जाएंगे और इन्हें केवल संबंधित पक्षकारों तथा अधिकृत अधिकारियों को ही उपलब्ध कराया जाएगा।

अपील पर 60 दिन में फैसला :
पक्षकार किराया, बिजली, पानी, रखरखाव और सुरक्षा शुल्क के निर्धारण या संशोधन के लिए किराया प्राधिकरण में आवेदन कर सकेंगे। निर्णय से असंतुष्ट होने पर मान्यता प्राप्त मूल्यांकनकर्ता से परिसर का मूल्यांकन कराया जा सकता है, जिसका खर्च आवेदक को उठाना होगा। दूसरे पक्ष को किराया प्राधिकरण में आवेदन पर 15 दिन में जवाब देना होगा, जिसे कारण दर्ज कर अधिकतम 30 दिन तक बढ़ाया जा सकता है। किराया अधिकरण को नोटिस की तामील के 60 दिन के भीतर अपील का फैसला करना होगा और सामान्यतः केवल एक स्थगन की अनुमति होगी। किराया न्यायालय के आदेश का निष्पादन नोटिस की तामील के 30 दिन में पूरा करना होगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button