
हिसार
शहर की सुबह केवल चिड़ियों की चहचहाहट से नहीं, छतों पर उछलते-कूदते बंदरों की धमक से भी शुरू होती है। सेक्टर-14, कमला नगर, डाकघर के आसपास का क्षेत्र, हाउसिंग बोर्ड कालोनी सहित शहर क्षेत्र में हालात ऐसे हैं कि लोगों ने अपने घरों के खुले आंगनों तक को लोहे की जालियों से ढकवा लिया है।
बच्चे छतों पर अकेले खेलने से कतराते हैं और बुजुर्ग दरवाजा खोलने से पहले बाहर झांकते हैं। वर्षों से लोगों के दैनिक जीवन पर भय की तरह पसरे इस संकट को कम करने की दिशा में नगर निगम ने एक बार फिर बंदरों को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
नगर निगम ने एक वर्ष के लिए बंदरों को पकड़ने का टेंडर आमंत्रित किया है। इच्छुक एजेंसी संचालक आवेदन कर सकते हैं। 15 जुलाई को टेंडर खोला जाएंगा। यदि एजेंसी या फर्म का कार्य संतोषजनक रहा तो अनुबंध को एक निर्धारित अवधि के लिए और बढ़ाया जा सकेगा।
50 हजार रुपये धरोहर
राशि निगम ने बंदरों को पकड़कर फिरोजपुर झिरका के अरावली क्षेत्र के जंगलों में सुरक्षित छोड़ने के लिए अधिकतम 600 रुपये प्रति बंदर की दर तय की है। वाहन, पिंजरे और कर्मचारियों सहित पूरी व्यवस्था ठेकेदार को स्वयं करनी होगी। इसके लिए निगम अलग से कोई भुगतान नहीं करेगा। ठेकेदार को 50 हजार रुपये की धरोहर राशि और एक हजार रुपये की टेंडर फीस भी जमा करानी होगी।
पकड़े गए बंदरों की सबूत के लिए करनी होगी वीडियोग्राफी और फोटो
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठेकेदार को बंदरों को जंगल में छोड़ते समय पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कर उसकी सीडी नगर निगम को उपलब्ध करानी होगी। इसके अलावा बंदरों को पकड़ने, परिवहन करने तथा निर्धारित स्थान तक पहुंचाने की तिथि सहित फोटोग्राफ भी भुगतान के बिल के साथ जमा करने होंगे।
पशु क्रूरता की तो होगी कार्रवाई टेंडर
की शर्तों में स्पष्ट किया गया है कि बंदरों को पकड़ने और उन्हें छोड़ने की पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की क्रूरता नहीं की जा सकती। यदि ऐसा पाया गया तो संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध पशु क्रूरता अधिनियम तथा हरियाणा म्युनिसिपल एक्ट, 1994 के तहत कार्रवाई की जाएगी। घायल बंदरों के उपचार तथा परिवहन के दौरान किसी बंदर की मृत्यु होने पर उसके निस्तारण की जिम्मेदारी भी ठेकेदार की होगी।
संतोषजनक कार्य नहीं होने पर ठेका होगा रद
टेंडर में 24 शर्तें निर्धारित की गई है। ठेका लेने वाली एजेंसी या फर्म का यदि बंदर पकड़ने का कार्य संतोषजनक नहीं पाया गया या शिकायतें प्राप्त हुईं तो जनहित में बिना कारण बताए भी ठेका समाप्त किया जा सकता है। टेंडर की किसी भी शर्त के उल्लंघन की स्थिति में धरोहर राशि जब्त करने के साथ ठेका निरस्त करने का अधिकार निगम आयुक्त के पास सुरक्षित रहेगा।
साल 2017 में शुरू किया था यह कार्य
पूर्व में भिवानी जिले के निवासी ठेकेदार कृष्ण कुमार के नेतृत्व में टीम ने साल 2017-18 में बंदर पकड़े थे। 21 नवंबर 2017 से 13 फरवरी 2018 तक बंदर पकड़े। उस दौरान निगम प्रशासन ने वन्य प्राणी विभाग से 3 हजार बंदरों की अनुमति ली तो 6 माह में टीम ने 2204 बंदर पकड़े। कोरोना के बाद 6 अक्टूबर 2020 से फिर बंदर पकड़े।
शहरवासियों को बंदरों के आतंक से छुटकारा दिलाने के लिए नगर निगम की ओर से टेंडर आमंत्रित करने के लिए कागजी औपचारिकताएं की जा रही है। बंदर पकड़ने जाने से लोगों को बंदरों के आतंक से काफी हद तक राहत मिलेगी। – प्रवीण पोपली, मेयर, हिसार
बंदरों के कारण किसी की गई जान तो कोई हुआ घायल
सेक्टर 14 में नवंबर 2016 में बंदरों को छत से भगाने के चक्कर में दादी-पोते की मौत भी हो गई थी। छत पर 11 वर्षीय पोता बंदर को भगा रहा था, तभी उसका डंडा बिजली के तारों को छू गया। पोते को बचाने के चक्कर में दादी भी करंट की चपेट में आ गई। हादसे मे दोनों की मौत हो गई थी।
इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था। l हाउसिग बोर्ड कालोनी में 5 वर्षीय वंशिका घर के आंगन में बहन के साथ खेल रही थी। उसी दौरान वहां बंदर आ गए और उन्होंने वंशिका पर हमला कर उसे काट लिया था। वंशिका के चिल्लाने की आवाज सुनकर स्वजन व पड़ोसियों ने उसे बंदरों से बचाया। चार बच्चों को भी जख्मी किया था। वहीं सेक्टर 1-4 स्थित हाउसिग बोर्ड कालोनी व शिव नगर में बंदरों का काफी आतंक है।
शहर के इन क्षेत्रों में बंदरों का आतंक
शहर के अधिकांश क्षेत्रों में बंदरों का आतंक है। इसमें मुख्य रूप से सेक्टर-14, सेक्टर 16-17, सेक्टर 9-11, कमला नगर, सेक्टर 13, डाकघर के आसपास का क्षेत्र, हाउसिंग बोर्ड कालोनी, डीएन कालेज मार्ग, खजांचियान बाजार, मोतीबाजार, पटेल नगर, पीएलए मार्केट, बस अड्डे के आसपास, मिलगेट सहित शहर विभिन्न सेक्टरों व कालोनियों में कई लोगों ने बंदरों के डर से अपने घरों के आंगन भी लोहे से कवर करवाए हुए हैं।




