“ज्ञानमेव शक्ति” की चेतना ही मनुष्य को नर से नारायण बनने का मार्ग करती है प्रशस्त : मंत्री परमार

भोपाल
उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा है कि भारतीय परम्परा में ज्ञान का सर्वोच्च स्थान रहा है। भारत का सनातन दर्शन केवल ज्ञान अर्जन का नहीं, बल्कि ज्ञान को साधना बनाकर आत्मोन्नति का मार्ग प्रशस्त करने का दर्शन है। “ज्ञानमेव शक्ति” की चेतना से प्रेरित होकर “नर से नारायण” बनने का यह सतत उपक्रम ही भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत महानता का आधार रहा है।
मंत्री परमार रविवार को भोपाल स्थित रविन्द्र भवन के गौरांजनी सभागार में आयोजित “मध्यप्रदेश : वैश्विक बौद्ध धरोहर केंद्र (Madhya Pradesh as a Global Buddhist Heritage Hub)” विषयक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेश को वैश्विक बौद्ध धरोहर केंद्र के रूप में स्थापित करने हेतु आवश्यक प्रयासों एवं पहलों पर अपने विचार व्यक्त किए।
परमार ने कहा कि भारत का मूल दर्शन “वसुधैव कुटुम्बकम्” का रहा है, जिसमें संपूर्ण सृष्टि के कल्याण का भाव निहित है। इसी सनातन विचारधारा को भगवान गौतम बुद्ध ने वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित किया। परमार ने कहा कि भगवान बुद्ध से जुड़े तीर्थस्थलों को आस्था एवं पर्यटन के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित किए जाने से भारत की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक वैभव विश्वमंच पर और अधिक सशक्त रूप से स्थापित होगा। परमार ने विश्वास व्यक्त किया कि इस सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्ष स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को पुनः विश्वगुरु और विश्वमंच का मुकुटमणि बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
बुद्ध का शांति संदेश आज पूरे विश्व की आवश्यकता : मंत्री कुशवाह
सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि भगवान गौतम बुद्ध केवल भारत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व में करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। उनका मानव कल्याण, करुणा और शांति का संदेश वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार धार्मिक, सांस्कृतिक और आस्था केंद्रों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए सतत कार्य कर रही है।
सांची केंद्रित बौद्ध सर्किट के विकास पर सरकार का विशेष फोकस
संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि आज जब विश्व हिंसा, असहिष्णुता, मानसिक तनाव और नैतिक संकटों से जूझ रहा है, तब भगवान बुद्ध का दर्शन और अधिक प्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार सांची को केंद्र में रखते हुए सतधारा, सोनारी, अंधेर, मुरेलखुर्द तथा बाघ गुफाओं को जोड़कर एक सुव्यवस्थित “मध्यप्रदेश बौद्ध हेरिटेज सर्किट” विकसित कर रही है। इसके अंतर्गत आधारभूत संरचना और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। साथ ही प्रदेश के बौद्ध स्थलों को बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर और राजगीर जैसे प्रमुख राष्ट्रीय बौद्ध तीर्थों से जोड़ते हुए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध यात्रा पैकेज विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में बौद्ध धरोहर संरक्षण, मध्यप्रदेश बौद्ध हेरिटेज सर्किट के विकास, सांस्कृतिक पर्यटन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा पवित्र बौद्ध अवशेषों की पुनर्प्राप्ति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक और सार्थक विमर्श हुआ। यह आयोजन प्रदेश को वैश्विक बौद्ध अध्ययन, आध्यात्मिक पर्यटन तथा सांस्कृतिक विरासत के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस अवसर पर ओडिशा की राजमाता डॉ. राज देवी, भोपाल नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, पद्म नारायण व्यास, उद्योगपति रोहित पिशाल तथा सम्मेलन के आयोजक भंते शाक्यपुत्र सागर सहित विभिन्न देशों से आए बौद्ध भिक्षु, विद्वान, शोधार्थी और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिगण उपस्थित थे।




