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गुरुग्राम में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की सर्किट बेंच की मांग, राज्यसभा में सांसद भाटिया ने उठाया मुद्दा

चंडीगढ़.

राज्यसभा में बृहस्पतिवार को शून्यकाल के दौरान सांसद संजय भाटिया ने गुरुग्राम में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सर्किट बेंच स्थापित किए जाने की जोरदार मांग उठाई। उन्होंने कहा कि यह केवल न्यायिक सुविधा का विषय नहीं, बल्कि सबके लिए न्याय, न्यायिक विकेंद्रीकरण और न्याय प्राप्त करने में आसानी से जुड़ा राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा है।

सदन में मुद्दा उठाते हुए राज्यसभा सदस्य संजय भाटिया ने कहा कि वर्तमान में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट केवल चंडीगढ़ में स्थित होने के कारण गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, पलवल, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ तथा दक्षिण हरियाणा के अन्य जिलों के लाखों वादकारियों, अधिवक्ताओं, उद्योगों, एमएसएमइ और कॉरपोरेट संस्थानों को प्रत्येक मामले के लिए चंडीगढ़ जाना पड़ता है। इससे मुकदमेबाजी की लागत, यात्रा का समय तथा अवसर लागत में अनावश्यक वृद्धि होती है और समयबद्ध न्याय प्राप्त करने में कठिनाई आती है। संजय भाटिया ने कहा कि गुरुग्राम आज देश का प्रमुख आइटी हब, कॉरपोरेट केंद्र, वित्तीय सेवाओं का महत्वपूर्ण केंद्र, स्टार्टअप इकोसिस्टम तथा औद्योगिक विकास का प्रमुख इंजन बन चुका है।

गुरुग्राम में हाईकोर्ट की सर्किट बेंच स्थापित होना आवश्यक
यहां बड़ी संख्या में वाणिज्यिक विवाद, श्रम संबंधी मामले, भूमि अधिग्रहण, मध्यस्थता, कर विवाद, दिवालियापन तथा संवैधानिक मामलों से जुड़े प्रकरण उत्पन्न होते हैं। ऐसे में गुरुग्राम में हाईकोर्ट की सर्किट बेंच स्थापित होना समय की आवश्यकता है। भाजपा सांसद ने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में गुरुग्राम में अत्याधुनिक 'टावर आफ जस्टिस' का उद्घाटन किया गया है, जिसमें आधुनिक न्यायिक अवसंरचना, डिजिटल कोर्टरूम और ई-कोर्ट सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह परिसर हाईकोर्ट की सर्किट बेंच के संचालन के लिए उपयुक्त आधार प्रदान करता है।

संजय ने किया संविधान 39ए का उल्लेख
संजय भाटिया ने अपने वक्तव्य में संविधान के अनुच्छेद 39ए का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य का दायित्व है कि प्रत्येक नागरिक को समान न्याय उपलब्ध कराया जाए। वहीं अनुच्छेद 21 के अंतर्गत त्वरित न्याय को भी जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा माना गया है। इसलिए न्यायिक संस्थाओं का विकेंद्रीकरण केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं बल्कि संवैधानिक दायित्व भी है।

उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि हरियाणा सरकार, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तथा अन्य संबंधित विभागों के साथ परामर्श कर गुरुग्राम में हाईकोर्ट की सर्किट बेंच स्थापित किए जाने की व्यवहार्यता अध्ययन शीघ्र प्रारंभ किया जाए। उनके अनुसार इससे न्याय तक आसान, सुलभ और समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित होगी, लंबित मामलों का बोझ कम होगा तथा दक्षिण हरियाणा में कानून के शासन, निवेशकों के विश्वास और व्यापार को नई गति मिलेगी।

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